uttar_pradesh_primary_teachers_association_agra_organized_protests_and_sloganeering_to_solve_the_problems_of_teachers_under_the control_of_basic_educatio_council_submitted_a_memorandum_to_the_joint_magistrate_date_04_10_2021_agr
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, आगरा ने बेसिक शिक्षा परिषद के नियन्त्राधीन शिक्षक/शिक्षिकाओं की समस्याओं के समाधन के लिए किया विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी, संयुक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन
समस्याओं का जल्द समाधान न हुआ तो होगा उग्र आन्दोलन-बृजेश दीक्षित
आगरा: सोमवार को राष्ट्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, आगरा ने सैंकड़ों शिक्षकों के साथ सूबे के मुखिया के नाम का ज्ञापन जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में संयुक्त मजिस्ट्रेट- प्रीति जैन को दिया।
ज्ञापन सौंपने से पहले सभी ने एक स्वर में वर्तमान परिदृश्य में सरकार के माध्यम से बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे प्रदेश में गतिमान कायाकल्प योजना की भूरि-भूरि प्रशंसा की। साथ ही यह भी बताया कि प्रदेश के शिक्षक पूरी निष्ठा से सरकार व विभाग के साथ कदम से कदम मिलाकर अपने निजी संसाधनों से विद्यालयों में छात्रों को प्रभावी ढंग से शिक्षा देने व देश हित में अपने दायित्वों को निभाने के साथ-साथ परिषदीय विद्यालयों के छात्रों को नये-नये आयाम स्थापित करा रहे हैं।
वहीं संगठन के जिलामन्त्री बृजेश दीक्षित ने कहा कि उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (सम्बद्ध अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ, नई दिल्ली) द्वारा शासन व विभाग को जनपद/प्रदेश के शिक्षकों की लम्बित समस्याओं को लेकर निरंतर पत्र के मध्यम से अवगत कराया जाता रहा है जो कि पिछले काफी समय से बेसिक शिक्षा परिषद के नियन्त्रणाधीन शिक्षक/शिक्षिकाओं की समस्याएँ शासन स्तर पर लम्बित हैं परन्तु शासन व विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा शिक्षकों की लम्बित समस्याओं का निस्तारण व समाधान नहीं किया गया है। जिसमें प्रदेश के लाखों-लाख शिक्षकों में सरकार व विभाग के प्रति काफी रोष व्याप्त है जिसके कारण प्रदेश के शिक्षक उग्र आन्दोलन करने के लिए विवश हैं।
जिसके लिए संगठन द्वारा शिक्षकों की प्रमुख समस्याओं के निराकरण हेतु प्रदेश सरकार से मांग की-
1. पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
2. डीबीटी एप पर फीडिंग एवं बी0एल0ओ0 के ड्यूटी सहित 36 प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति प्रदान की जाए, जिससे विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि की जाए।
3. 01 दिसम्बर 2008 के बाद पदोन्नत प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय/सहायक अध्यापक पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को 17140 न्यूनतम वेतनमान व प्रधानाध्यापक पूर्व माध्यमिक विद्यालय को 18150 न्यूनतम वेतनमान का शासनादेश निर्गत किया जाए।
4. प्रदेश के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान किया जाए।
5. मृतक आश्रित के पाल्यों को योग्यतानुसार नियुक्ति प्रदान की जाए व मृतक आश्रित नियुक्ति चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को योग्यतानुसार उच्चीकृत कर समायोजित किया जाए।
6. प्रदेश के शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को शिक्षक के पद पर समायोजित किया जाए।
7. प्रदेश के शिक्षकों का आकांक्षी जनपदों से अन्तर्जनदीय स्थानान्तरण/जनपद के अन्दर स्थानान्तरण एवं शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को अतिशीघ्र प्रारम्भ किया जाए।
8. प्रदेश के विभिन्न जनपदों के शिक्षकों का चयन वेतनमान के उपरान्त वेतन विसंगति है। (जिसमें वरिष्ठ शिक्षक, कनिष्ठ शिक्षकों से कम वेतनमान पा रहे हैं जिससे आर्थिक नुकसान हो रहा है।) चयन वेतनमान विसंगति का शासनादेश अतिशीघ्र जारी किया जाए।
कार्यक्रम के दौरान संगठन के जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र कसाना ने कहा कि यदि उक्त मांगों को पूरा नहीं किया गया तो भविष्य में शिक्षकों द्वारा सड़कों पर उतरकर उग्र आन्दोलन करने की चेतावनी दी और कहा कि इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष धमेंद्र कंसाना, जिलामन्त्री बृजेश दीक्षित, संरक्षक चंद्रकांत गालब, माण्डलिक मंत्री ओमवीर डागुर, मुनेंद्र राठौर, राकेश त्यागी, राजेन्द्र त्यागी, हरेंद्र वर्मा, रविन्द्र बघेल, भनवीर सिंह, मनोज शर्मा, कृष्ण गोपाल उपाध्याय, सुनील कटारा, नंद किशोर शर्मा, समुद्र सिंह, शिव सिंह धाकड़, शिवकुमार शर्मा, अशोक आरेला दिनेश शर्मा, राहुल कौशिक, राघवेंद्र सिकरवार, सुरेश चाहर, मनीष कोहली, अजीत नरवरिया,आनंद शर्मा, शिवनरेश सिसौदिया, गौरव शर्मा, संतोष राजपूत, मनीषा यादव, विंदु यादव निजामुद्दीन, रामराज सिंह आदि उपस्थित रहे ।
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